फायरब्रांड पार्टी के फायरब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा इस प्रश्न से मंच छोड़कर भागे!






बीजेपी की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने मिलकर एक साथ सुर में सुर मिलाए कि मैं ये करूंगा जनता के लिए तो मैं वो करूंगा जनता के लिए। उसमें एक नारा ये भी लगाया गया कि महिलाओं और बहन बेटीयों की सुरक्षा की जाएगी।

लेकिन सवाल ये उठता है कि इन सरकारों ने मिलकर माताओं और बहनों की कितनी इज्जत बचा ली है वो तो जगजाहिर है लेकिन बात करते हैं एक ज्वलंत मुद्दे की जिसमें बीजेपी के नेता पर ही छेड़छाड़ का आरोप लग गया है।

20 महिला पत्रकारों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया। लेकिन सवाल ये उठता है कि जब बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा से पत्रकारों ने एम.जे.अकबर के विषय में एक प्रश्न पूछा तो संबित पात्रा मंच से क्यों भाग खड़े हुए। इस मुद्दे को मसलन पढ़िए नहीं बल्कि इसके तह तक जाकर समझने की जरूरत है।

अरे भाई! बीजेपी के दिग्गज तो अभी तक माता-बहनों की सुरक्षा की दुहाई दे रहे थे लेकिन ये क्या खुद मंत्री जी ऐसी शर्मिंदगी भरी हरकतें क्यों करने लगे? क्या किए गए वादे भूल गए या पद ग्रहण के वक्त ली हुई शपथ भूल बैठे?

लगता तो ऐसा था कि जिस तरह वादे और कसमें खाई जा रही हैं, बस क्षण भर में जादू की छड़ी घुमाते ही देश की सारी कमियां ही खत्म हो जाएंगी। जरा सोचीए साहब कि जब घर का रक्षक ही खुद भक्षक बन जाए तो उस घर के अंदर बसिंदे बने लोगों का जीवन कैसा होता होगा।

दरअसल बीजेपी की पोल आए दिन खुलती जा रही है। बीजेपी जितना खुद को महिलाओं की सबसे बड़ी शुभचिंतक बता रही थी शायद वो सारे अरमान अब महज कूड़े का ढेर बनते दिखाई दे रहे हैं। आप शायद इन बातों को बीजेपी के चहेते लोगों से कहेंगे तो वो गाली-गलौज पर उतारू हो जाएंगे।

क्योंकि वो लोग कभी निष्पक्ष भाव से मुद्दे को सोचने और समझने की क्षमता ही नहीं रखते हैं। उनको बस जिंदाबाद के नारे लगाकर गले की नस जाम करने की आदत सी है। मुद्दे की बात करें तो बीजेपी के दिग्गज एम. जे. अकबर पहले खुद पत्रकार रह चुके हैं, और उन पर कई महिला पत्रकारों ने आरोप लगाए हैं कि वो अपने करियर के दौरान कई महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण किये हैं।

अब यहां मुद्दा एक नया मोड़ ले लिया साहब कि ऐसे लोग जो समाज में इस तरह की घटिया हरकत भी कर चुके हैं वो मंत्री पद कैसे पा गए? इसका क्या मतलब समझा जाए कि जितने भी लोग मंत्री पद पाते हैं क्या उनके लिए करप्ट होना ही मंत्रीपद की योग्यता घोषित होती है?


अब कई बीजेपी के चहेते मुंह उठा कर गाली देंगे कि मैं क्या उलूल-जुलूल बोलने लगा। लेकिन चिल्लाइये मत इससे पहले भी कई बीजेपी नेताओं ने ये हरकतें की हैं। जिन पर रेप और शारीरिक शोषण का आरोप लग चुका है। समझ में नहीं आता कि इसे राजनीति कहा जाए या करप्शन का अखाड़ा?

जहां नेता से लेकर मंत्री तक केंद्र और राज्य से लेकर सरकारी कर्मचारी तक सब करप्ट हैं। खैर एम. जे. अकबर के मामले का खुलासा होते ही उन्होंने बीजेपी को बाय-बाय कर दिया और अपनी इज्जत बचाने के लिए भाग खड़े हुए।

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