सरकार से लगी किसानों की आस, आखिर कब बुझेगी प्यास

जनता की आवाज़ (विकाश शुक्ला )


वो अन्नदाता हैं ! जो खुद धूप में जलकर दूसरों के लिए अनाज का पैदावार करते हैं, लेकिन दिल्ली के गद्दी पर बैठे नेताओं को जरा देखिए..इन्हें फुरर्सत ही नहीं है कि किसानों की हालत भी देखें..अक्सर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं हमारे देश में घट ही जाती हैं। चुनाव के दौरान बड़ी बड़ी कसमे और वादे करने वाले नेता आखिर कहाँ गए।

तो जरा सोचिए…जिस देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर हो, उस देश के किसानों के पास पीने के लिए पानी नहीं है, पेट भरने के लिए खाना नहीं है, और मजबूर होकर जिंदगी की जगह मौत को गले लगा रहे है..वो देश किस विकास की बात कर रहा है..और किस अच्छे दिन का ख्वाब दिखा रहा है ? अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है…

चाहे महाराष्ट्र हो या तमिलनाडु के उन किसानों की जो केंद्र सरकार से उम्मीदें लगाकर  38 दिन अपना दर्द बयां करते हुए कोशिशों की सारी हदें पार कर चुके थे. तमिलनाडु के किसानो ने क्या क्या नहीं किया, नग्न अवस्था में प्रदर्शन, मुंह में सांप दबाना, चूहे खाना और यहाँ तक की उन्होंने मानव मूत्र पीकर अपना विरोध जताया था। शर्म आती है कभी कभी ऐसी सरकार पर जो देश में तरह तरह की परियोजना चला सकती है करोड़ों रुपये बर्बाद कर सकती है लेकिन इन किसानों की प्यास नहीं बुझा सकती है। आखिर उन परियोजनाओं का लाभ लेगा कौन जब जनता प्यास से ही मर जाएगी । ऐसे में उनका जीवन क़र्ज़ और प्यास के बोझ से दब चुका है। किसानों का आरोप है कि आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद सरकार ने कान में तेल डाल रखा है।


कर्जमाफी को लेकर महाराष्ट्र के किसानों का रौद्र रूप स्पष्ट दिखाई देने लगा है। किसानों का रुख़ देखते हुए महाराष्ट्र सरकार भी ऐक्शन में आ गई है. किसानों की मांगों पर विचार के लिए फडणवीस सरकार ने एक कमेटी बनाई है, जिसमें छह मंत्री शामिल हैं. कमेटी में चंद्रकांत पाटिल, पांडुरंग फुडकर, गिरीश महाजन, विष्णु सवारा, सुभाष देशमुख और एकनाथ शिंदे शामिल हैं. इससे पहले किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अपनी तरफ से कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन को किसानों से बातचीत करने भेजा था जिन्होंने किसानों को अश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक है.  महाजन ने कहा, 'सोमवार को माननीय मुख्यमंत्री के साथ इनकी चर्चा होने वाली है. इनके जो सभी कार्यकारणी सदस्य हैं, इनके प्रमुख हैं, वो जाकर माननीय मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे और मुझे लगता है इसमें से पॉजिटिव हल निकालने वाले है.'

किसानों का कहना है कि सोमवार को मुलाकात के बाद भी अगर सरकार ने उनकी मांगें न मानी तो सभी किसान आजाद मैदान में ही डटे रहेंगे. वे वहां तब तक जुटे रहेंगे जब तक कि उनकी मांगों को लेकर कोई हल नहीं निकलता है. किसानों की मांग है कि उनकी पूर्ण कर्ज माफी हो, उपज का उचित मूल्‍य मिले और स्‍वामीनाथन आयोग की सिफारिशें मानी जाएं.

इससे पहले भी किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई और कुछ अन्य शहरों के लिए सब्जियों और दूध की आवाजाही रोकने के प्रयास सहित हिंसा की छिटपुट घटनाएं देखी गई थी   और यहाँ तक की प्रदेश के कुछ हिस्सों में किसानों ने कर्ज माफी सहित विभिन्न मांगों को उठाने के लिए लगातार प्रदर्शन करते आये है लेकिन दूसरी तरफ देखा जाए तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले भी कह चुके थे कि 1.34 लाख करोड़ की रकम कर्ज माफी के लिए चाहिए और इतनी तो सरकार की आमदनी भी नहीं है। किसान संगठन सभी किसानों की कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र मे कुल 1 करोड़ 36 लाख किसान हैं और इन किसानों पर कुल कर्ज 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपये हैं, जबकि राज्य सरकार सिर्फ 31 लाख किसानों का 30 हजार 500 करोड़ रुपये माफ करने पर विचार कर रही है।

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