भ्रष्टाचार की आग में जलता भारत,


विकाश शुक्ला

कुछ बाते दिल को छु जाती है, तो लिखना ही पड़ता है, बहुत लोग मिलते है चाहे वो सत्ता पक्ष के हो या विपक्ष के,कोई न कोई बाते करता रहता है कोई किसी सरकार को तो कोई किसी सरकार को आखिर कब तक होता रहेगा....लेकिन जो मैंने लिखा है इसे जरुर पढ़े और लोगो तक पहुचाये



हमारे देश की चर्चाएं बहुत दूर दूर तक हैं यह कहना गलत नहीं होगा लेकिन इन चर्चाओं के बीच भ्रष्टाचार की भी चर्चा काफी जोर पर है यह भी कहना गलत नहीं होगा  इसलिए हमें जरूरत है इसको रोकने की  हमें यह कहते हुए  शर्म भी आती है और अफ़सोस भी होता है की हमारे पास ईमानदारी नही है जिस तरह हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी पूरे जोर सोर से भ्रष्टाचार को रोकने में लगे हैं उसी प्रकार अन्य सरकार या हमारी जनता इसको रोकने में सहयोग क्यों नहीं करती हैं  हमारे रोजमर्रा के जीवन में यदि देखा जाये तो भ्रष्टाचार का कीड़ा इतनी गहराई तक घुस गया है की सारे देशवासियों को अंधा बना दिया है और बेईमानी एक राष्ट्रीय मजबूरी बनकर सभी के नसों में प्रवेश कर गई है अच्छे कर्म करने में लोग इस तरह  शर्माते हैं जैसे घर में आई कोई नई नवेली दुल्हन शर्माती हो गन्दी राजनीति का बीज बोकर हुकूमत की रोटीयां सेकने वाले नेताओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है

इतने भ्रष्टाचारियों को देखकर एक ही पंक्ति का स्मरण बार बार होता है घर घर में है रावण बैठा इतने राम कहा से लांऊ भ्रष्टाचार भूख और बेरोजगारी जनता और नेताओं पर इतना हावी हो गया है की सांस लेना दूभर हो गया है राशन कार्ड बनवाने स्कूल में प्रवेश लेने और यहाँ तक की सांस लेने के लिए भी रिश्वत की जरूरत पड़ती है अगर इन बातों को जनता नकारती रही तो कब तक हमलोग नरेंद्र मोदी और आदित्य नाथ जी को ढूढते फिरेंगे हम बहुत बड़ी बड़ी बातें करते फिरते है की सरकार कुछ नहीं कर रही है लेकिन कभी जनता ये सोचती है की हम क्या कर रहे हैं हम तभी क्यों जागते हैं जब हमारे हांथों में हज़ारों मोमबत्तियां एक मकसद के लिए एक साथ जल उठती हैं  उससे पहले हम क्यों सोये रहते हैं सिर्फ क्रांति की मशाल जलाकर नारे लगाकर आमरण अनशन करके या सरकार को नीचा दिखाकर भ्रष्टाचार की जंग नहीं जीता जा सकता है

 इस्लामिक स्टेट हमारे देश पर हमला करता है और हमारे देश में ही छिपे कुछ जहरीले सांप उनकी मदद करते हैं फिर हम एक अच्छे भारत की कल्पना कैसे कर सकते हैं हमको अपने खुद के गिरेबान में झांककर देखना होगा तभी कुछ अच्छे होने की उम्मीद जगाई जा सकती है जब हमारे देश में कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है और उसका दोष साबित हो जाता है फिर भी उसको जेल में डालकर सुरक्षित कर दिया जाता है उसको ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे लोगों के रोंगटे खड़े हो जायें लेकिन हमारी सरकार को सापों को दूध पिलाने का शौक है
 खूब पिलाइये दूध एक दिन ऐसा भी आएगा की ये आपके ही खून की एक घूँट भी नसीब नहीं होने देंगे 

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