प्यार के आगे भी है जिंदगी

VIKASH SHUKLA



प्यार क्या होता है ? प्यार की पहचान क्या है ? क्या प्यार को शब्दों में पिरोया जा सकता है ? क्या प्यार को कलम के नोक के नीचे परिभाषित किया जा सकता है ? क्या शब्दों के बाण से घायल होकर प्रेमी अपने दिल हार जाते है ? या आँखों की गुस्ताखी उन्हें प्यार करने को मज़बूर कर देती है ?  ऐसे तमाम सवाल है जो प्यार के संदर्भ में हर किसी के मन में उजागर होता है. लेकिन प्यार वाकये में  होता क्या है ? इसको परिभाषित करना थोड़ा कठिन है.

मेरे हिसाब से प्यार शब्दों का बाण नहीं और ना ही आँखों की गुस्ताखी होती है, बल्कि प्यार उस एहसास का नाम है जिसमे दो दिलों की धड़कन एक दूसरों के लिए धड़कने लगती है. प्यार में  एक पल की भी गैरमौजूदगी सदियों की दुरी लगने लगती है. प्यार अपने प्यार को हर वक़्त अपने पास रखना चाहता है , उसको महसूस करना चाहता है, इबादद करना चाहता है. प्यार की लकीर जिस माथे पर खुशनसीबी बनकर  खिंच जाये उसकी जिंदगी किसी जन्नत से काम नहीं होती .




कहते है की प्यार भगवान्  का दूसरा स्वरूप होता है. जिस तरह भगवान्  को पूजते है उसी तरह प्यार में भी सजदा करना पड़ता है, तब जा कर प्यार की अमृत जिंदगी में घुलती है. प्यार शब्दों का मोहताज नहीं है और ना ही भाषा का गुलाम है. ये तो बस आँखों ही आँखों की भाषा पढ़ कर दिल के किसी कोने में समा जाता है.

लेकिन जिस प्यार के लिए लैला-मजनू , हीर-राँझा, सोहनी-महिवाल, जैसे लोग मौत को गले लगा कर अजय-अमर हो गए , क्या वही प्यार का जूनून आज की युवा पीढ़ी में है. प्यार में कुछ भी पाने की ऊमीद नहीं रखते है बल्कि अपना सब कुछ प्यार पर न्योछावर कर देते है. लेकिन आज की युवा पीढ़ी प्यार से कुछ पाने की चाहत रखते हैं. प्यार करने के पीछे मकसद या लोभ रखते हैं, इसलिए आज की युवाओं को प्यार में नाकामी मिलती है. इसलिए जिंदगी से नाराज होकर कुछ गलत कदम उठा लेते है .

हम प्यार में साथ जीने-मरने की कसमे खाते हैं , हर सुख-दुःख साथ सहने का वादा  करते हैं, लेकिन जब ये वादें, कसमें निभा नहीं पाते हैं तो , जिंदगी हमें निराश लगने लगती है और हम जिंदगी ख़त्म करना चाहते है. लेकिन क्या प्यार की नाकामी ज़िन्दगी ख़त्म करने के लिए मजबूर कर सकती है. क्योकि प्यार के आगे भी तो एक जहाँ हैं, संसार है, परिवार है , उस परिवार की जिम्मेदारियां हैं..

प्यार करना कभी भी गलत नहीं हो सकता है, और होगा भी कैसे प्यार तो भगवान का दिया हुआ अनमोल तोहफा है.  आज कल के कुछ लड़के और लड़कियां प्यार तो कर लेते है लेकिन उस प्यार को निभा नहीं पाते है , और ठुकरा कर चले जाते है.  इस समय  प्यार के धागें इतने कमजोर हो गए हैं की थोड़ी सी ही अनसुनी में रिस्तें बिखर जातें हैं. इससे प्यार करने वाला इंसान टूट जाता है और अपने जिंदगी में गलत कदम उठा लेता है

प्यार में रुस्वाई और बेवफाई किसी सदमे से कम नहीं होती है , और ये सदमा ज्यादातर लड़कों के ही हिस्सों में आता है. लड़कियां बेस्ट चॉइस के लिए अपने प्यार के साथ छोड़ कर किसी और के दामन थाम लेती है और लड़के इसी प्यार के लिए आंसू बहाते हैं और मरने मिटने पर आ जाते हैं, लेकिन यहाँ समझना होगा की किसी के जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होती. प्यार जिंदगी का एक हिस्सा है ना की जिंदगी प्यार का हिंसा है.

https://youtu.be/v845EA3i8wk




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