इसी को कहते है सत्ता में सरकार,फिर भी नही सुनी गयी पुकार

विकाश शुक्ला

मै कल से देख रहा था सोशल मीडिया पर सिर्फ एक ही आवाज़ थी, की मोनू सिंह निर्दोष है उन्हें फसाया गया है ,कई सारे मीडिया वेबसाइट ने भी खबर लिखी, और मोनू के घर में बहुत दुखद माहोंल था, जहा से वैभव उर्फ़ मोनू सिंह के पिताजी यानी बीजेपी विधायक बावन सिंह है उसी विधानसभा से मै भी जुड़ा हुआ हु, और मेरा निवास भी वही का है तो कल से ही लिखने को सोच रहा था, सब कुछ पढने और देखने के बाद कुछ यू लिखा

देश में बीजेपी प्रदेश में बीजेपी लेकिन फिर भी नहीं मिला बीजेपी विधायक के बेटे को इंसाफ। जहां देश में चारों तरफ बीजेपी का बोलबाला है और जनता बीजेपी पर आंख बंद करके अपने विश्वास की मुहर लगाती चली जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ वक्त की नजाकत को देखा जाए तो बीजेपी कई मामलों में सुस्त पड़ती दिखाई दे रही है। जिस तरह से गोंडा के कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह के बेटे वैभव उर्फ़ मोनू को हत्या के मामले में कोर्ट ने सजा सुना दिया और बीजेपी के दिग्गजों की आवाज तक नहीं निकल पायी। इससे सब कुछ एक आईने की तरह साफ होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जनता का कहना है कि मोनू निर्दोष है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के दिग्गजों के गले से आवाज ही नहीं निकल रही है। जबकि विधायक बावन सिंह वो नेता हैं जिनकी पहुंच उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक है। बावजूद इसके मोनू इतनी आसानी से कानून के पंजों में कैसे चले गए? किस सबूत के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया? जबकि जनता की अदालत में अब भी मोनू को दोषी मानने को तैयार नहीं है। शायद इन हादसों की जद में आने के बाद मोनू के दिमाग में भी यही लाइनें घूम रही होंगी-

एहसान ये रहा इल्जाम लगाने वालों का मुझ पर,
 उठती उँगलियों ने मुझे मशहूर कर दिया।




गोंडा के कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह के बेटे गौरव सिंह उर्फ मोनू की हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में निजी चिकित्सक को बरी कर दिया। वहीं गार्ड पर जानलेवा हमले के मामले में विधायक के बेटे को दोषी मानते हुए तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। दोषी करार दिए गए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जिला कारागार भेज दिया गया है।

शहर के आरएन पाण्डेय नर्सिंग होम के 8 मई 2012 के बहुचर्चित मामले में मंगलवार को दोपहर बाद अपर सत्र न्यायधीश/विशेष न्यायधीश ईसी एक्ट महेश नेवटियाल की ओर से कटरा से भाजपा विधायक के पुत्र समेत 6 लोगों को अलग-अलग मामलों में दोषी करार दिया गया है। अदालत ने इस मामले में फैसले के लिए अगली तारीख 18 जनवरी मुकर्रर की है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस अभिरक्षा में दोषी करार दिए गए अभियुक्तों को जेल भेजा गया।
इस फैसले की जानकारी देते हुए आरएन पाण्डेय नर्सिंग होम पक्ष के अधिवक्ता मिर्जा शाहिद बेग ने मीडिया को बताया कि अदालत की ओर से विधायक पुत्र वैभव सिंह उर्फ मोनू सिंह को हत्या के प्रयास और अंग-भंग मामले में दोषी करार दिया गया है।

प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विनय सिंह ने बताया कि उक्त हत्या के मामले में विधायक के छोटे बेटे वैभव ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि वाहन पार्किंग के विवाद को लेकर उनके भाई मोनू को गोली मार दी गई, अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गयी। इस मामले में उन्होंने आरएन पांडेय नर्सिंग होम के संचालक डॉ. राजेश पांडेय के साथ ही छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश महेश नौटियाल ने मंगलवार को हत्या के मामले को गैर इरादतन हत्या में बदलते हुए मुख्य आरोपी डॉ. राजेश पांडेय को दोषमुक्त कर दिया, जबकि विश्वास पांडेय, चंद्र मोहन मिश्र, सुरेश उर्फ बब्लू पांडेय, अवधेश तिवारी व पवन मिश्र को दोषी करार दिया है। उधर अस्पताल के गार्ड पर गोली चलाने के मामले में डॉ. राजेश पांडेय ने विधायक के छोटे बेटे वैभव  सिंह उर्फ मोनू समेत चार के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में न्यायाधीश ने विधायक के बेटे को दोषी करार दिया है। जबकि भाई तिरपन  सिंह  उर्फ विजय प्रताप, राणा प्रताप ¨ व अजीत  सिंह  को दोषमुक्त कर दिया है।


क्या था मामला

8 मई 2012 को आरएन पाण्डेय नर्सिंग होम में पार्किंग विवाद में हुई फायरिंग में विधायक बावन सिंह के पुत्र डॉ. गौरव सिंह की मौत इलाज के दौरान हो गई थी। विधायक पक्ष की ओर से इस मामले में चिकित्सक समेत कई के विरुद्ध केस दर्ज कराया गया था। वहीं चिकित्सक पक्ष की ओर से विधायक पुत्र वैभव सिंह, उनके चाचा विष्णु प्रताप सिंह आदि के विरुद्ध क्रास केस दर्ज कराया गया था। इसी की सुनवाई अदालत में चल रही थी।


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